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Showing posts from February, 2012

.जागो ..रे ....जागो

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अरे ! अरे ! ...आज तो 19 फरवरी है ..... तो क्या हुआ ?..... अरे माँ ..! आज वोट डालने जाना है ...... आज पता चलेगा की हमारे पडोसी .हमारे मुहल्ले वाले कितने  जागरूक है...रोज सुबह सुबह पाठक जी अखबार पढते समय कितनी गलतिया सरकार की गिनाते है और इतनी जोर - जोर से  सुनाते भी तो है आज देखती हूँ पाठक जी वोट डालने जाते है की नहीं ..वरना कल से मै....इनको  अख़बार पढ़ के सुनउगी ....... माँ ...मै तो चली वोट देने आप लोग भी दे आना ........... आज तो सड़को में अजीब सी रोनक देखने को मिल रही है......अरे ये क्या ? इतने... रंगों , पार्टियों  के झंडे दुकानों में , घरो के बहार यो लो एक तो मेरे घर के उपर ही लगा है . चलो कोई बात नहीं आज इनका दिन है मना लेने दे इनको ... कही पर सन्नाटा है ..क्योकि टेम्पो नहीं  चल रही .गाड़िया नहीं चल रही , दुकाने नहीं  खुली है तो कही पर थोड़ी रोनक भी है कुछ लोग कही गुट बनाके खड़े है , तो कही पर बच्चे लोग अपने घरो से बहार निकल कर क्रिकेट खेल रहे है . कुछ लोग अपने परिवार वालो के साथ वोट डालने निकले है और एक आदमी उन सबको समझा रहा है .".देखो तुम लोग एक बात समझ लो  फलाना आदमी हमारा…

मतदान है जिस दिन .....

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घुमो न पार्को में , न मॉलो में उस दिन 
देश बदलने का निर्णय लेना है हमे जिस दिन 

करो न बेकार अपने अधिकार को तुम 
देश की किस्मत लिखनी है जिस दिन ....

गर्व करो अगर मतदाता हो तुम 
सही निर्णय की पहचान तुम्हे देनी है जिस दिन 

सोये हुए हो तो जागो जरा तुम ..
जागे हुए हो तो औरो को जगाओ जरा तुम .....

पहल करोगे तो सुरुवात होगी 
वरना कहने से बाते और बेकार होगी ...

तो निकलना ही होगा घरो से उस दिन 
देश बदलने का निर्णय लेना है हमे जिस दिन



वादों का जंजाल

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इंसानों की इस दुनिया में ,हैवान नज़र आ जाता है क्यों ? हर जगह अब हमको एक वाद नज़र आ जाता है ।
धरती माँ की कोख से जन्म लेकर मिला था धर्म इंसानियत , एक - दूजे पर मरना है बस अब ये है मात्र  कहावत  अब  इंसानियत जैसे धर्मो में भी..... "धर्मवाद " नजर आ जाता है । क्यों ? हर जगह अब हमको एक वाद नज़र आ जाता है ।
जानी थी नस्ले अभी तक ,पशुओ में ही होती है रंग - रूप की  कहानिया आज भी हकीकत होती है । अब हर व्यक्ति के मन में ..... "नस्लवाद " नजर आ जाता है । क्यों ? हर जगह अब हमको एक वाद नज़र आ जाता है ।
भाषा के सारे बंधन तोड़ , दिल की बोली ही दिखती थी  हिंदी , उर्दू  और सभी मिठास दिलो में घोलती थी । अब इन्ही बोलो में हमे....... "भाषावाद"  नजर आ जाता है । क्यों ? हर जगह अब हमको एक वाद नज़र आ जाता है ।
इश्वेर के मन में न कोई छोटा न बड़ा है , पर आज मनुष्यों ने इस कथन को असत्य करके छोड़ा है । अब अक्सर इस समाज में ...... "जातिवाद " नजर आ जाता है । क्यों ? हर जगह अब हमको एक वाद नज़र आ जाता है ।
जूझ रहा है युवा आज का इस प्रतियोगिता के दौर से , नौकरिया मिलती है सिर्फ रिश्तेदारों को अधिकारियो के ओ…