तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर


ईश्वर ने जब इंसान की रचना की तो उसे किसी बंधनों में नहीं बांधा और न ही उसे हर चीज की आजादी दी। उसे जिससे अच्छा अनुभव हुआ, उसने उसे सही मान लिया और जिससे कड़वा उसे गलत। इसी अनुसार इंसान ने अपनी जरूरतें पहचानी और उसे पाने के लिए एक सीमा तय की जिसमें रह कर वह अपना जीवनयापन करने लगा। लेकिन आज के समय में इंसान ठीक वैसा ही प्राणी बन गया जैसा कि वो आदिकाल में धरती पर आया था। न ही उसे सही की पहचान है और न ही गलत की, शायद इसलिए की उसने अपनी कोई सीमा ही नहीं तय की। आज वो जिंदगी जीने के लिए नहीं जी रहा है, बल्कि वक्त काटने के लिए जी रहा है। शायद मेरी इन बातों से बहुत लोग सहमत न हो पर सच्चाई तो यही है। शांत मन से सोचिए जरा ! क्या हम वाकई अपनी खुशी के लिए जी रहें हैं ? क्या हम वो सब कुछ कर पाते हैं जो हमें अच्छा लगता है? जवाब बाहर से तो हां होगा लेकिन मन कहेगा, " नहीं कर पाते हैं।'' पता है, ये सारे मसले हमारे बनाए हुए हैं क्योंकि हम जैसे हैं वैसे नहीं दिखना चाहते। जैसे दूसरे हमें देखना चाहते हैं वैसा बनने की कोशिश में हम भटकते रहते हैं।
जो अपने बारे में सोचते हैं दुनिया उन्हें सेलफिश यानि स्वार्थी कहती है। एक बात बताइए ... क्यूं नहीं सोच सकता कोई इंसान अपने बारे में। जब तक वो खुद संतुष्ट नहीं होगा, खुद खुश नहीं होगा... वो कैसे दूसरों को खुश रख सकता है।
सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है,
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है…

ये जो आप आज का युग देख रहे हैं वो ठीक इस गीत के बोल सा है। यहां हर एक शख्स परेशान है, कोई लड़ रहा है, कोई किसी की जान ले लेता है तो कोई खुद को खत्म कर लेता है, कोई दूसरों की खुशी से जल रहा है तो कोई घुट-घुट कर मर रहा है। इन सबके लिए सिर्फ एक ही चीज जिम्मेदार है वो है सेल्फ सैटिस्फैक्शन यानि की आत्मसंतुष्टि की कमी। हम जब तक जिंदगी को बोझ की तरह जीयेंगे तब तक न हम खुश रह सकते हैं और न हीं हम से जुड़े लोग।
जिंदगी का लम्हा बहुत छोटा सा है। कल की कोई बुनियाद नहीं है। भूल जाइए अपनी हर परेशानियां.. ये आपको सिर्फ परेशान करेंगी। मत उलझिए सपनों के जाल में जो आपके पास है वो हकीकत है उसे और भी खूबसूरत बनाइए। जो आपसे ही आपका सकून छीन लें उसे पाने की कोशिश क्यूं कर रहें हैं? ईश्वर ने कितनी सुंदर कितनी प्यारी दुनिया बनायी है उसका लुफ्त उठाइए। चलते वक्त के साथ कदम बढ़ाइए लेकिन कुछ खोने के लिए नहीं कुछ पाने के लिए । अगर अब भी आप अनजान बने रहना चाहते हैं तो बेशक बने रहिए पर ये भी मत भूलिए कि ऐसी जिंदगी दोबारा नहीं मिलेगी। अब तय आपको करना है कि जिंदगी जीने के लिए जीयेंगे या फिर सिर्फ वक्त काटने के लिए।

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